गुरुवार, जून 21, 2007

सितारों की दुनिया से वापसी...

कहने को सुनीता लौट रही है। लेकिन ये लौटना नहीं, आगे बढ़ना है। वो अपने साथ कुछ धरती ले गई और कुछ आसमान ला रही है। उसके सफर में कई पुराने सफर शामिल हैं। ठीक पचास साल पहले स्पूतनिक ने जब अंतरिक्ष में जाकर धरती का चक्कर लगाया तो उस वक्त भी लोगों ने ये ख्वाब देखा होगा कि एक दिन इंसान आसमान में डग भरेगा और चांद पर कदम रखेगा। ठीक चार साल बाद यूरी गागरिन ने एक ख्वाब पूरा किया और उसके नौ साल बाद नील आर्मस्ट्रांग के साथ इंसान चांद पर पहुंच गया। तब लोगों ने कहा कि भले ये इंसान का एक कदम हो, लेकिन इंसानियत की बड़ी छलांग है। शायद लौटती हुई सुनीता को यूरी गागरिन याद आता हो, उसकी धमनियों में नील आर्मस्ट्रांग का रोमांच बहता हो। एक सफर कई चीज़ों से मिलकर बनता है। अटलांटिस में स्पूतनिक की याद भी बसी है, चैलेंजर और वाइकिंग जैसे पुरखों का साहस भी और आने वाले दौर का खयाल भी। फिर याद रखना जरूरी है कि ये सफर सिर्फ कामयाबियों से नहीं, कई नाकामियों से भी बना है। इसमें आसमान में कहीं बिखर गया कोलंबिया भी शामिल है और हमारी कल्पना चावला भी जो हमारे सामने ही हमसे दूर चली गई। दरअसल ऐसी नाकामियों से इंसान मायूस भले मायूस हुआ हो, हारा नहीं है। अंतरिक्ष में इंसान का सफर कम से कम इसका एक बडा सबूत है। आज हम चांद के आगे जाकर मंगल को खंगाल चुके और शुक्र और शनि के उपग्रहों में जीवन की संभावना खोज रहे हैं। अपने जैसा कोई सांस लेने वाला, चल और बोल सकने वाला, सोच और समझ सकने वाला खोजने की ये जो चाह है वो बताती है कि इंसान असल में जहां भी जाए, अपने-आप को खोजने और पहचानने की कोशिश करता है। यही उसकी कामयाबी का राज है।

4 टिप्पणियाँ:

मंगल, रायपुर ने कहा…

सुनीता विलयम्स ने बड़ा काम किया है लेकिन मीडिया कल्पना चावला की याद दिलाकर इस घटना को कुछ ज्यादा ही बड़ा करने में जुटा है। ठीक है सुनीता ने बड़ा काम किया है। पर मीडिया अब बस करे। बहुत हो गया।

सुबोध राय ने कहा…

अब शायद सुनीता के बहाने अपने देश की महिलाओं के बारे में गंभीर चिंतन की जरुरत है सुनीता को अन्तरिक्ष यात्री से ज्यादा अब हमे खुद के समाज के लिये एक सबक मानना चाहिये।

Raju Sajwan ने कहा…

जब सुनीता अन्तरिक्ष में थी तो मेरे बेटे ने पुछा कि वह अन्तरिक्ष में क्यों गयी है तो मैं इतना ही बता पाया कि इतिहास बनाने के लिये... । बेटा मेरी बात नहीं समझ पाया, लेकिन मुझे पता है कि एक दिन जरूर समझ जाएगा ।

pawan lalchand ने कहा…

priydarshanji,
sunita ne na keval ye sabit kiya ki vigyan ki koi bhi vijay aakhiri nahi hai.sath hi sunita aurat ki kamyabi ki kahani bhi aasman me drj kr aai..
....ndtv me aap logo ke praso ka fayda keval darshko ko hi nahi mil rha hai balki hindi me news ki jo samajh ndtv india me samne rakhi hai usne hm jaiso ki bhi badi maddat ki hai.